भारतीय परिवारों में पैतृक संपत्ति को लेकर झगड़े आम हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसलों ने नियम साफ कर दिए। अब बेटियां बेटों जितना हकदार। बिना सबकी सहमति कोई प्रॉपर्टी हिला नहीं सकता। प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों के लिए ये जानना जरूरी।

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अविभाजित जमीन पर सबका बराबर हक
अगर पैतृक संपत्ति बंटी नहीं, तो एक व्यक्ति अकेले नहीं बेच सकता। सभी वारिसों की सहमति अनिवार्य। पहले partition करवाएं। बंटवारे के बाद मिला हिस्सा आपका निजी हो जाता। इसे बेचें, गिफ्ट करें या वसीयत में लिखें। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया केस में यही पुष्टि की।
बेटियों को जन्म से समान अधिकार
पुराने नियम बदल गए। बेटियां पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर हिस्सेदार। 2020 के ऐतिहासिक फैसले ने क्रांति ला दी। अब आदिवासी महिलाओं को भी पूरा हक। कोई बहाना नहीं चलेगा। जन्म प्रमाण पत्र से दावा मजबूत करें।
दावा करने की समय सीमा सतर्क रखें
12 साल से ज्यादा देरी की तो हक कमजोर। कब्जा न रखें या समय पर दावा न करें, तो अधिकार चला जाएगा। जल्दी कार्रवाई करें। कोर्ट possession की तारीख से गिनती करता है।
माता-पिता बेदखली कर सकते हैं
बच्चे देखभाल न करें, तो माता-पिता संपत्ति से निकाल सकते। सीनियर सिटीजंस एक्ट ने उन्हें ताकत दी। ट्रिब्यूनल में अपील करें। नोटिस देकर बेदखल करें। परिवार पहले, संपत्ति बाद।
बिक्री एग्रीमेंट से मालिकाना हक नहीं
सिर्फ समझौता काफी नहीं। रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और कब्जा जरूरी। बिना रजिस्ट्री पुराना मालिक ही असली मालिक। टाइटल सर्च कराएं। सभी वारिसों की NOC लें।
बचाव के आसान उपाय
परिवार से चर्चा करें। दस्तावेज जमा रखें। वकील से सलाह लें। फैमिली सेटलमेंट डीड रजिस्टर कराएं। वसीयत लिखें। RTI से रिकॉर्ड चेक करें। सही कदम से विवाद टलेंगे। संपत्ति परिवार की शांति बनी रहेगी।
















