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भारत में सबसे ज्यादा ज़मीन किसके पास है? सरकार के बाद किसके पास है सबसे ज्यादा ज़मीन? जानकर हो जाएंगे हैरान!

भारत में सबसे ज्यादा जमीन सरकार के पास (15,531 sq km)! नंबर 2 कैथोलिक चर्च—7 करोड़ हेक्टेयर, 1 लाख करोड़ वैल्यू। तीसरा वक्फ बोर्ड—6 लाख प्रॉपर्टीज। ब्रिटिश लेजसी, विवाद जारी। स्कूल-हॉस्पिटल बने, लेकिन ट्रांसपेरेंसी जरूरी। सरप्राइज लिस्ट!

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भारत में सबसे ज्यादा ज़मीन किसके पास है? सरकार के बाद किसके पास है सबसे ज्यादा ज़मीन? जानकर हो जाएंगे हैरान!

भाई, सोचो जरा भारत में सबसे ज्यादा जमीन किसके पास है? सरकार तो नंबर वन है ये तो सब जानते हैं, लेकिन उसके बाद? सरप्राइज! कैथोलिक चर्च का नाम आता है। हां, वो चर्च जिनके स्कूल, अस्पताल हर शहर-गांव में दिखते हैं। फिर वक्फ बोर्ड। ये बातें सुनकर आंखें फटी की फटी रह गईं ना? मैंने भी पहली बार सुना तो यही हुआ। चलो, गपशप स्टाइल में खोलते हैं इस राज को। ये आंकड़े रिपोर्ट्स से आए हैं, लेकिन ऑफिशियल नहीं फिर भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं। देश की इतनी बड़ी संपत्ति किसके कब्जे में है?

#1: सरकार की विशाल संपत्ति

सबसे ऊपर सरकार। कुल मिलाकर 15,531 स्क्वायर किलोमीटर जमीन—ये कोई मजाक नहीं! छोटे देश जैसे कतर या सिंगापुर इससे भी छोटे हैं। रेलवे सबसे आगे, फिर डिफेंस और कोयला मिनिस्ट्री। ट्रेन स्टेशन, आर्मी कैंप, कोल माइंस—सब इनके नाम। ये जमीनें देश चलाने के लिए हैं, लेकिन वैल्यू अरबों डॉलर की। कभी सोचा? हम टैक्स देते हैं, ये संपत्ति बनती है। अच्छा है ना, कम से कम पब्लिक यूज में तो है। लेकिन प्राइवेट प्लेयर्स के पास भी कम नहीं।

#2: चर्च की 1 लाख करोड़ की जमीन!

अब नंबर टू—कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया। करीब 7 करोड़ हेक्टेयर जमीन, वैल्यू 1 लाख करोड़ से ऊपर! इन पर हजारों स्कूल, हॉस्पिटल, चर्च बने हैं। एजुकेशन और हेल्थ में तो ये कमाल करते हैं। लेकिन कैसे मिली इतनी जमीन? 1927 का पुराना कानून, ब्रिटिश राज में। अंग्रेजों ने सस्ते दामों पर दी ताकि ईसाई मिशनरी फैले। 1965 में गवर्नमेंट ने कई लीज रिजेक्ट कीं, लेकिन विवाद आज भी चलते हैं। कोर्ट केस, प्रोटेस्ट—सब चल रहा। चर्च कहता है सर्विस के लिए, क्रिटिक्स कहते हैं चेक करो रिकॉर्ड्स। इंटरेस्टिंग ना?

#3: वक्फ बोर्ड की 6 लाख प्रॉपर्टीज

तीसरा स्पॉट वक्फ बोर्ड का। ये ऑटोनॉमस बॉडी है—मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान सब इसके अंडर। पूरे देश में 6 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज! मुस्लिम कम्युनिटी के वेलफेयर के लिए। लेकिन यहां भी ड्रामा—एन्क्रोचमेंट, डिस्प्यूट्स। कई जगह अवैध कब्जे, कोर्ट में केस। गवर्नमेंट ने डिजिटलाइजेशन शुरू किया है ताकि ट्रांसपेरेंसी आए। अच्छा स्टेप है।

आंकड़े अनुमानित: क्यों विवाद?

ये आंकड़े एस्टिमेटेड हैं, कोई सिंगल ऑफिशियल रिपोर्ट नहीं। लैंड रिकॉर्ड्स अभी भी ज्यादातर मैनुअल, डिजिटल हो रहा है। भट्टा, जमाबंदी—ये सब सुधार हो रहे। लेकिन सवाल ये कि इतनी वैल्यूएबल लैंड का क्या हो? कुछ कहते हैं चर्च-वक्फ की जमीनें टैक्स फ्री हैं, गवर्नमेंट को लॉस। दूसरे कहते हैं सोशल सर्विसेज के लिए जरूरी। बहस तो चलेगी ही।

इतनी जमीन बिके तो क्या होगा?

अब सोचो, अगर ये जमीनें मार्केट में आ जाएं तो क्या? हाउसिंग, इंडस्ट्री—इकोनॉमी बूम। लेकिन इमोशनल, रिलिजियस इश्यूज हैं। गवर्नमेंट को स्ट्रॉन्ग लैंड पॉलिसी चाहिए। डिजिटल रिकॉर्ड्स, एनक्रोचमेंट रोक—ये तो हो रहा। लेकिन ट्रांसपेरेंसी लाओ। किसान, छोटे मालिकों को भी राहत दो।

तुम्हारा क्या ख्याल: बहस जारी!

ये टॉपिक गहरा है। चर्च ने एजुकेशन में योगदान दिया, वक्फ सोशल वर्क करता है। लेकिन अकाउंटेबिलिटी जरूरी। तुम्हारा क्या ख्याल? सरकार सबसे अमीर, लेकिन प्राइवेट होल्डर्स भी पावरफुल। नेक्स्ट टाइम जमीन खरीदो तो सोचो, इतिहास क्या कहता है। इंटरेस्टिंग फैक्ट्स भरा देश है हमारा!

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