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Car Sickness: गाड़ी में सफर करते समय बार-बार उलटी क्यों आती है? शरीर के ये संकेत हो सकते हैं कारण

गाड़ी में उल्टी क्यों आती है? मोशन सिकनेस दिमाग को आंख-कान के कन्फ्यूज सिग्नल से होता है। बचाव: सामने देखें, अदरक चबाएं, मोबाइल न छुएं। खाली पेट सफर न करें। अवमोस्ट्रिन गोली या एक्यूप्रेशर बैंड ट्राई करें। पहाड़ी ट्रिप को मजेदार बनाएं!

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Car Sickness: गाड़ी में सफर करते समय बार-बार उलटी क्यों आती है? शरीर के ये संकेत हो सकते हैं कारण

सफर के दौरान गाड़ी में उल्टी या चक्कर आना तो सभी ने कभी न कभी महसूस किया होगा। खासकर बच्चों और महिलाओं में ये शिकायत आम है। मेडिकल भाषा में इसे मोशन सिकनेस कहते हैं, जो बस, ट्रेन, जहाज या प्लेन में ज्यादा परेशान करता है। सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जाए? चलिए, आसान भाषा में समझते हैं।

मोशन सिकनेस क्या बला है?

ये वो हालत है जब सफर में आपको जी मिचलाना, सिर घूमना, पसीना आना या उल्टी होने लगती है। हर तीन में से एक इंसान इससे जूझता है। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी की टेढ़ी-मेढ़ी सड़कें या समुद्र की लहरें इसे और भयानक बना देती हैं। अच्छी बात ये है कि ये जानलेवा नहीं, बस असहज कर देता है। शरीर का संतुलन बिगड़ने से ऐसा होता है, लेकिन थोड़ी सी समझ और तैयारी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

दिमाग, आंख और कान असली वजह यही है

सफर में दिक्कत तब शुरू होती है जब आपके दिमाग को आंखों, कानों और शरीर से मिले-जुले संकेत परेशान कर देते हैं। मान लीजिए आप कार में बैठे हैं और फोन स्क्रॉल कर रहे हैं। आंखें कहती हैं – सब स्थिर है। लेकिन कान के अंदर का बैलेंस सिस्टम (वेस्टिबुलर सिस्टम) चिल्लाता है – भाई, गाड़ी दौड़ रही है! शरीर सोचता है कि कोई जहर घुस गया है, इसलिए उल्टी का बटन दबा देता है ताकि सफाई हो जाए। डॉक्टर बताते हैं कि ये कन्फ्यूजन ही मोशन सिकनेस की जड़ है। बच्चों में ये ज्यादा होता है क्योंकि उनका सिस्टम अभी मैच्योर नहीं।

बचाव के घरेलू नुस्खे

सबसे आसान तरीका – सामने सीट लें, खिड़की के पास बैठें और क्षितिज रेखा को देखते रहें। किताब पढ़ना या मोबाइल न छुएं, इससे कन्फ्यूजन बढ़ता है। अदरक चबाएं, अदरक की कैंडी, चाय या बिस्किट कमाल करता है। नींबू पानी या पुदीना चटनी भी पेट शांत रखती है। खाली पेट सफर न करें, हल्का नाश्ता जैसे बिस्किट लें। ज्यादा पानी पिएं, लेकिन चाय-कॉफी या तला-भुना अवॉइड करें। बच्चों को गाने सुनाएं या कहानी सुनाएं, ध्यान भटक जाएगा। लंबे सफर में रुक-रुक कर ताजी हवा लें।

दवा और स्पेशल टिप्स

अगर घरेलू उपाय कम पड़ें, तो डॉक्टर से बात करें। अवमोस्ट्रिन या सिनेरिज़ जैसी गोलियां सफर से 30 मिनट पहले खा लें। स्कोपोलामाइन पैच कान के पीछे लगाएं, 72 घंटे राहत देता है। मॉर्निंग सिकनेस वाली प्रेग्नेंट महिलाएं विटामिन B6 ट्राई करें। एक्यूप्रेशर बैंड्स कलाई पर बांधें – ये प्रेशर पॉइंट दबाकर जी मिचलाहट रोकते हैं। धीरे-धीरे सफर की आदत डालें, जैसे शॉर्ट ट्रिप्स से शुरू करें। स्मोकिंग और परफ्यूम से दूर रहें, ये ट्रिगर करते हैं।

सफर को मजेदार बनाएं, बीमारी को भगाएं!

मोशन सिकनेस कोई बड़ी बीमारी नहीं, बस थोड़ी स्मार्ट प्लानिंग चाहिए। अगली बार हिल स्टेशन जाएं तो अदरक साथ रखें, सामने देखें और म्यूजिक ऑन कर दें। परिवार के साथ ट्रिप प्लान कर रहे हैं? सबको ये टिप्स बता दें। स्वस्थ रहें, घूमें-फिरें और जिंदगी एंजॉय करें। सफर की खुशी बरकरार रखने के लिए आज ही तैयारी शुरू करें!

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