राजस्थान के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट्स अब पटरी पर दौड़ने को तैयार हैं। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एनएचएआई टीम को इन परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का काम बिना देरी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे न केवल सड़क नेटवर्क मजबूत होगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी, खासकर जयपुर और आसपास के इलाकों में।

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बैठक में निकले बड़े फैसले
मुख्यमंत्री ने हाल की एक महत्वपूर्ण बैठक में जयपुर रिंग रोड के उत्तरी भाग का निर्माण जल्द शुरू करने पर जोर दिया। शहर की ट्रैफिक सुधार के लिए लॉजिस्टिक हब, वेयरहाउस और गोदाम बनाने की योजना पर रिपोर्ट मांगी गई। 200 फीट चौराहे पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई, जबकि अन्य सड़क प्रोजेक्ट्स जैसे जयपुर-ब्यावर-पचपदरा और अलवर-भरतपुर-आगरा की अपडेट साझा की गई।
दो प्रमुख प्रोजेक्ट्स एनएचएआई के पास
राजस्थान में कुल नौ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने हैं, जिनमें जयपुर-पचपदरा और बीकानेर-कोटपूतली अब एनएचएआई संभालेगा। पहले राज्य सरकार इन्हें विकसित करने वाली थी, लेकिन अब केंद्रीय एजेंसी से तेज प्रगति की उम्मीद है। जमीन अधिग्रहण से ये हाई-स्पीड रोड जल्द तैयार होंगे।
नौ एक्सप्रेस-वे, रूट और लंबाई
- कोटपूतली-किशनगढ़: 181 किमी, एनएच-48/448 से पनायला तक।
- जयपुर-किशनगढ़-पचपदरा: 350 किमी, जयपुर से जोधपुर होते पचपदरा।
- जयपुर-भीलवाड़ा: 193 किमी, रिंग रोड से भीलवाड़ा बायपास।
- बीकानेर-कोटपूतली: 295 किमी, एनएच-11/62 से पनियाला।
- ब्यावर-भरतपुर: 270 किमी (घटकर), भरतपुर से बगरू।
- जालोर-झालावाड़: 402 किमी, इकोनॉमिक कॉरिडोर से दिल्ली-मुंबई।
- अजमेर-बांसवाड़ा: 390 किमी, अजमेर से एनएच-927ए।
- जयपुर-फलोदी: 345 किमी, रिंग रोड से एनएच-11।
- श्रीगंगानगर-कोटपूतली: 290 किमी, रीको बायपास से नरनौल।
ये कॉरिडॉर्स राज्य को राष्ट्रीय हाईवे से जोड़कर विकास की नई राह खोलेंगे।
















