
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के लगभग 5 लाख पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, आगामी 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिला पेंशन कार्यालयों को बंद कर दिया जाएगा, सरकार के इस कदम से बुजुर्ग पेंशनर्स के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि अब उन्हें अपनी पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए राजधानी भोपाल का रुख करना होगा।
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नई व्यवस्था और बदलाव के मुख्य कारण
राज्य सरकार पेंशन वितरण प्रणाली में एकरूपता लाने और इसे पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए यह कदम उठा रही है।
- सभी जिला कार्यालयों को समाप्त कर अब भोपाल में एक केंद्रीकृत पेंशन कार्यालय (Centralized Pension Office) स्थापित किया जा रहा है।
- पेंशन का भुगतान सीधे ट्रेजरी (कोषागार) और बैंकों के माध्यम से DBT (Direct Benefit Transfer) प्रणाली द्वारा किया जाएगा, ताकि देरी को कम किया जा सके।
- वर्तमान में विभिन्न जिलों के पेंशन कार्यालयों के कामकाज के तरीकों में अंतर था, जिसे दूर करने के लिए पूरी व्यवस्था को एक ही केंद्र से नियंत्रित किया जाएगा।
पेंशनर्स में भारी आक्रोश और चिंता
सरकार के इस फैसले से बुजुर्ग पेंशनर्स के बीच हड़कंप मच गया है, अभी तक पेंशनभोगी अपने जिले के कार्यालय में जाकर समस्याओं का समाधान करवा लेते थे, लेकिन अब दूर-दराज के जिलों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए भोपाल आना शारीरिक और आर्थिक रूप से एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पेंशनर्स को होने वाली चुनौतियां
इस नई व्यवस्था के लागू होने से स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं खत्म हो जाएंगी:
- छोटी-मोटी शिकायतों या दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अब बुजुर्गों को स्थानीय कार्यालय के बजाय भोपाल जाना पड़ सकता है।
- पेंशनर समस्या निवारण एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वर्तमान जिला स्तरीय व्यवस्था को बहाल रखने की मांग की है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां
- पेंशनर्स को अब अपना जीवित प्रमाण पत्र ऑनलाइन पोर्टल या बैंक शाखाओं के माध्यम से जमा करना होगा।
- जनवरी 2026 से प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पेंशन राशि में भी संशोधन की उम्मीद है, जिससे न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़कर ₹20,000 से अधिक हो सकती है।
















