
बिहार में जमीन विवादों को खत्म करने और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नीतीश सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपना लिया है, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नई नियमावली के अनुसार, अगर आपकी जमीन ‘अवैध जमाबंदी’ की श्रेणी में आती है, तो प्रशासन महज 45 दिनों के भीतर उसे आपके हाथ से छीन सकता है।
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अवैध जमाबंदी पर चलेगा सरकारी डंडा
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वैसी जमीनें जो मूल रूप से सरकारी (गैरमजरूआ आम/खास, केसर-ए-हिंद या खास महल) हैं, लेकिन गलत तरीके से किसी व्यक्ति के नाम पर दर्ज (जमाबंदी) हो गई हैं, उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा, जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसी जमाबंदियों को चिह्नित कर 45 दिनों के भीतर रद्दीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।
सर्वे 2026: समय सीमा बढ़ी, नियम हुए कड़े
बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वे की समय सीमा को अब दिसंबर 2026 तक विस्तार दे दिया गया है, विभाग का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक राज्य के हर खेत और प्लॉट का डिजिटल खतियान तैयार हो जाए।
खबर के मुख्य बिंदु
- यदि आपने जमीन खरीदी है और दाखिल-खारिज (Mutation) के आवेदन में कोई त्रुटि है, तो उसे सुधारने के लिए केवल 30 दिन का समय मिलेगा, समय बीतने पर आवेदन सीधे खारिज कर दिया जाएगा।
- जमीन मालिकों को अपनी भूमि का ब्योरा Bihar Bhumi Portal पर स्व-घोषणा पत्र के माध्यम से देना होगा।
- अप्रैल 2026 से 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए ‘डोरस्टेप रजिस्ट्रेशन’ की सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे उन्हें रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
सावधान! कहीं आपकी जमीन भी तो इस लिस्ट में नहीं?
अगर आपकी जमीन की जमाबंदी सालों पुरानी है, तब भी आपको सतर्क रहने की जरूरत है, राजस्व विभाग के अनुसार, यदि रिकॉर्ड में जमीन की प्रकृति ‘सरकारी’ दर्ज है, तो वर्तमान दखल-कब्जा होने के बावजूद जमाबंदी रद्द कर दी जाएगी, विशेषज्ञों की सलाह है कि नागरिक तुरंत बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर अपना ‘अपना खाता’ और ‘पंजी-2’ चेक करें।
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कैसे करें बचाव?
- अपनी जमीन के लगान रसीद और पुराने केवाला (Registry Paper) को अपडेट रखें।
- यदि आपकी जमीन सर्वे या रद्दीकरण की जद में आती है, तो निर्धारित 45 दिनों के भीतर संबंधित अंचल अधिकारी (CO) या भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पास साक्ष्य प्रस्तुत करें।
बिहार सरकार का यह कदम भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है, हालांकि आम जनता को अपने कागजात दुरुस्त करने के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ सकती है।
















