
अगर आप पहली बार लोन लेने जा रहे हैं या खराब क्रेडिट हिस्ट्री की वजह से आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर जीरो है, तो अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करते हुए ‘नॉन-क्रेडिट डेटा’ नियम को हरी झंडी दे दी है, इस नए कदम के बाद, बैंक अब केवल सिबिल स्कोर के आधार पर आपका लोन आवेदन खारिज नहीं कर पाएंगे।
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क्या है RBI का नया ‘नॉन-क्रेडिट’ नियम?
अब तक बैंकों के पास किसी व्यक्ति की साख (Credibility) जांचने का एकमात्र जरिया उसका पिछला लोन रिकॉर्ड या क्रेडिट कार्ड हिस्ट्री होती थी, लेकिन RBI के नए दिशानिर्देशों के तहत, बैंक अब वैकल्पिक डेटा (Alternative Data) का उपयोग करेंगे, इसका मतलब है कि अगर आपका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है, तो भी आपकी वित्तीय आदतों के आधार पर आपको लोन मिल सकेगा।
इन 4 पैमानों पर तय होगी आपकी योग्यता
अब बैंक सिबिल स्कोर के बजाय आपकी इन गतिविधियों पर नजर रखेंगे:
- उपयोगिता बिलों का भुगतान: आपके बिजली, पानी और गैस कनेक्शन के बिलों का समय पर भुगतान।
- मोबाइल और ब्रॉडबैंड बिल: आपके पोस्टपेड मोबाइल बिल और इंटरनेट रिचार्ज की नियमितता।
- बैंक ट्रांजेक्शन हिस्ट्री: आपके सेविंग अकाउंट में होने वाले लेन-देन और मंथली बैलेंस का रिकॉर्ड।
- किराया भुगतान: यदि आप रेंट एग्रीमेंट के जरिए डिजिटल रूप से किराया चुकाते हैं, तो इसे भी सकारात्मक व्यवहार माना जाएगा।
‘पब्लिक टेक प्लेटफॉर्म’ से मिलेगी मदद
RBI ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘पब्लिक टेक प्लेटफॉर्म फॉर फ्रिक्शनलेस क्रेडिट’ (PTPFC) लॉन्च किया है, यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां बैंकों को ग्राहक की सहमति से उनके पैन (PAN), आधार, और अन्य सरकारी डेटाबेस से जानकारी मिल जाएगी, इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और ‘जीरो सिबिल’ वाले ग्राहकों को भी चंद मिनटों में लोन मिल सकेगा।
किन्हें होगा सबसे ज्यादा फायदा?
- नए प्रोफेशनल्स: वे युवा जो अभी नौकरी में आए हैं और जिनका कोई लोन रिकॉर्ड नहीं है।
- MSME सेक्टर: छोटे कारोबारी जो नकदी में व्यापार करते हैं लेकिन उनके पास बिजली बिल जैसे दस्तावेज मौजूद हैं।
- ग्रामीण ग्राहक: जहाँ बैंकिंग पहुंच कम है, वहाँ वैकल्पिक डेटा लोन दिलाने में गेम-चेंजर साबित होगा।
विशेषज्ञों की राय
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के इस फैसले से देश में ‘फाइनेंशियल इंक्लूजन’ (वित्तीय समावेशन) को बढ़ावा मिलेगा, इससे उन लोगों को साहूकारों के चंगुल से आजादी मिलेगी जिन्हें सिबिल स्कोर न होने के कारण बैंक लोन नहीं देते थे।
अब लोन लेने के लिए भारी-भरकम क्रेडिट स्कोर की अनिवार्यता धीरे-धीरे खत्म हो रही है, यदि आप अपने रोजमर्रा के बिलों का भुगतान समय पर करते हैं, तो आपका बैंक आपको लोन देने के लिए बाध्य होगा।
















