
दोस्तों, आपने भी नोटिस किया होगा कि पेट्रोल पंप पर टैंक भरवाते वक्त दिल बैठा जाता है। हाल ही में देश की तीन बड़ी तेल कंपनियों – इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने पेट्रोल-डीजल के दामों में प्रति लीटर कुछ रुपये की कटौती की है। ये खबर तो अच्छी है, लेकिन क्या ये काफी है? कई राज्यों में अभी भी पेट्रोल 100 रुपये के पार घूम रहा है। वजह? राज्यों के वैट और लोकल टैक्स। कभी-कभी ट्रांसपोर्ट कॉस्ट भी इन्हें और ऊपर चढ़ा देती है। आज हम बात करेंगे कि आखिर कहां महंगा, कहां सस्ता पड़ रहा है ईंधन।
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ये राज्य झेल रहे सबसे ज्यादा मार
सबसे पहले बात उन जगहों की जहां पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। आंध्र प्रदेश में तो हालत ये है कि अमरावती जैसे शहर में एक लीटर पेट्रोल 109.87 रुपये तक पहुंच गया है। दक्षिण भारत में ही केरल (107.54 रुपये) और तेलंगाना (107.39 रुपये) भी पीछे नहीं हैं। भोपाल में 106.45, पटना में 105.16, जयपुर में 104.86 रुपये – ये आंकड़े बताते हैं कि मध्य, पूर्वी और पश्चिमी भारत के बड़े शहरों में भी राहत कम ही मिली है। मुंबई (104.19), कोलकाता (103.93), भुवनेश्वर (101.04), चेन्नई (100.73) और रायपुर (100.37) जैसे शहरों में भी 100 का आंकड़ा पार हो चुका है। कुल मिलाकर 10-12 राज्यों और शहरों में ये स्थिति बनी हुई है। क्या आपका शहर भी इस लिस्ट में है?
सस्ते ईंधन वाले कोने
अब अच्छी खबर! जहां कीमतें कम हैं, वहां जिंदगी थोड़ी आसान लगती है। सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलता है अंडमान-निकोबार में – पेट्रोल करीब 82 रुपये और डीजल 78 रुपये प्रति लीटर। दिल्ली तो हमेशा से सस्ते दामों के लिए फेमस रही, यहां पेट्रोल 94.76 और डीजल 87.66 रुपये है। गोवा के पणजी में पेट्रोल 95.19, डीजल 87.76 रुपये, जबकि गुवाहाटी में पेट्रोल 96.12 रुपये मिल रहा है। असम, दिल्ली, गोवा और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में कम वैट की वजह से ये राहत मिल रही है। कुल 20 से ज्यादा राज्यों में पेट्रोल 100 के नीचे है, लेकिन ये राज्य ज्यादातर छोटे या कम पॉपुलेटेड हैं।
वैट और टैक्स: असली विलेन कौन?
दोस्तों, बेस प्राइस तो हर जगह एक जैसा होता है, लेकिन राज्यों का वैट गेम चेंजर है। महाराष्ट्र, केरल जैसे राज्यों में वैट 30% से ऊपर चढ़ जाता है, जबकि दिल्ली में ये 20% के आसपास है। डीलर कमीशन, एक्साइज ड्यूटी और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट भी इकट्ठा होकर बोझ बढ़ाते हैं। केंद्र सरकार ने रेटिंग कम की, लेकिन राज्य टैक्स घटाने को तैयार नहीं। नतीजा? उत्तर भारत में राहत ज्यादा, दक्षिण में बोझ। क्या आपको लगता है कि यूनिफॉर्म वैट की जरूरत है?
आम आदमी पर असर
ये सिर्फ ड्राइवरों की बात नहीं। ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से सब्जी, दूध से लेकर टैक्सी किराया तक महंगा हो जाता है। किसान भाई डीजल पर निर्भर हैं, ट्रक ड्राइवर रात-दिन सड़क पर। सरकारें चुनावी वादे करती हैं, लेकिन कीमतें कंट्रोल से बाहर। क्या LPG, CNG जैसी वैकल्पिक चीजें अपनानी चाहिए? या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इंतजार करें? फिलहाल, ऐप चेक करते रहिए daily rates।
आगे क्या? उम्मीद की किरण
तेल कंपनियां रोज रिव्यू करती हैं। ग्लोबल क्रूड प्राइस गिरे तो और राहत मिल सकती है। लेकिन राज्य सरकारों को वैट घटाना होगा। अगली बार पंप पर खड़े होकर सोचिएगा – ये सिर्फ पेट्रोल नहीं, हमारी जेब की कहानी है। आपका शहर में क्या रेट चल रहा? कमेंट में बताइए!
















