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Gorakhpur-Shamli Expressway: 700 KM लंबा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, 22 जिलों के गांवों की किस्मत में होगा बदलाव, रूट मैप देखें।

700 किमी लंबा ये एक्सप्रेसवे पूर्वी UP को पश्चिम से जोड़ेगा। बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत व लखीमपुर में काला चुने गए। 3D घोषणा के बाद अधिग्रहण शुरू, अगले साल निर्माण। व्यापार-रोजगार बूम, उत्तराखंड कनेक्शन मजबूत। तीन साल में तैयार!

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Gorakhpur-Shamli Expressway: 700 KM लंबा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, 22 जिलों के गांवों की किस्मत में होगा बदलाव, रूट मैप देखें।

उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल तेजी से बिछ रहा है, और अब गोरखपुर से शामली तक का ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे एक नई क्रांति लाने वाला है। लगभग 700 किलोमीटर लंबा ये एक्सप्रेसवे पूर्वी इलाके को पश्चिमी हिस्से से जोड़ेगा, जिससे यात्रा का समय आधा हो जाएगा। बरेली मंडल के जिलों से गुजरते हुए ये प्रोजेक्ट न सिर्फ व्यापार को बूस्ट देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। कल्पना कीजिए, गोरखपुर से मेरठ तक बस कुछ घंटों में पहुंचना – ये सपना अब हकीकत बनने को तैयार है।

एक्सप्रेसवे का रूट

ये एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या और लखनऊ को छूते हुए सीतापुर पहुंचेगा। फिर लखीमपुर खीरी, पीलीभीत के बीसलपुर, शाहजहांपुर के पुवायां से होकर बरेली के फरीदपुर, नवाबगंज और बहेड़ी तहसीलों के गांवों को जोड़ेगा। उसके बाद रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ होते हुए शामली तक चलेगा। बरेली जैसे महत्वपूर्ण शहरों को सीधा फायदा होगा, जहां से उत्तराखंड का रास्ता भी आसान हो जाएगा। ये रूट इतना सोच-समझकर बनाया गया है कि ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

भूमि अधिग्रहण की तैयारी

अब असली काम शुरू हो चुका है – जमीन का अधिग्रहण। NHAI ने बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में Competent Authority for Land Acquisition (काला) का चयन कर लिया है। बरेली, शाहजहांपुर व पीलीभीत में ADM को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि लखीमपुर में SDM संभालेंगे। NHAI ने पहले ही सर्वे पूरा कर जिला प्रशासन को लिस्ट भेज दी थी। प्रोजेक्ट मैनेजर तकनीकी अश्वनी चौहान ने कन्फर्म किया कि सब कुछ तय हो गया है। अब चयनित जमीन को 3D (Three-D) घोषित करने की कवायद चल रही है, जिससे एक साल के लिए खरीद-फरोख्त पर रोक लग जाएगी।

3D घोषणा का मतलब

3D घोषणा होते ही जमीन का क्रय-विक्रय पूरी तरह बंद हो जाएगा। अगर एक साल में ये घोषणा न हुई तो रोक हट जाएगी, लेकिन हो गई तो अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चलेगी। किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, जैसा कि कानून में तय है। ये प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, ताकि कोई विवाद न हो। स्थानीय लोग थोड़ा परेशान हैं, लेकिन लंबे समय में ये उनके लिए वरदान साबित होगा – नई नौकरियां, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक उछाल।

आसपास की सड़क परियोजनाएं

ये एक्सप्रेसवे अकेला नहीं आ रहा। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे बन रहा है, जो उत्तराखंड से सीधा कनेक्शन देगा। बरेली-सीतापुर हाईवे पहले ही फोरलेन हो चुका, अब इसे सिक्सलेन में बदला जा रहा है। इसी तरह बरेली-मथुरा हाईवे को भी सिक्सलेन बनाया जा रहा है, जिससे आगरा-मथुरा तक यात्रा सुगम हो जाएगी। जिले से दो नेशनल हाईवे तो गुजरते ही हैं, ऊपर से ये एक्सप्रेसवे – बरेली अब सड़क नेटवर्क का हब बनने को तैयार है। नाथ नगरी का महत्व और बढ़ेगा, क्योंकि ये दिल्ली-लखनऊ के बीच में है।

फायदे जो बदल देंगे जिंदगी

सोचिए, पूर्वी UP के किसान अपनी उपज को पश्चिमी बाजारों तक जल्दी पहुंचा सकेंगे। उद्योगपति नए प्लांट लगाएंगे, क्योंकि लॉजिस्टिक्स सस्ती हो जाएगी। पर्यटन को भी बूस्ट मिलेगा – अयोध्या से मेरठ तक धार्मिक-सांस्कृतिक सर्किट तैयार। रोजगार के लिहाज से हजारों जॉब्स आएंगी, खासकर निर्माण के दौरान। उत्तराखंड से जुड़ाव बढ़ने से हिल स्टेशनों की यात्रा आसान हो जाएगी। कुल मिलाकर, ये प्रोजेक्ट UP की GDP को नई ऊंचाई देगा।

समयसीमा और उम्मीदें

NHAI का दावा है कि अगले वित्तीय वर्ष से निर्माण शुरू हो जाएगा, और तीन साल में एक्सप्रेसवे तैयार। ये ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, यानी नई जमीन पर बनेगा, तो पुरानी सड़कों की मरम्मत की जरूरत नहीं। लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी न हो, यही चिंता है। अगर सब ठीक रहा तो 2029 तक हम इस पर गाड़ियां चला रहे होंगे। सरकार की ये सौगात पूर्वांचल को मुख्यधारा से जोड़ेगी।

भविष्य की सड़कें

ये एक्सप्रेसवे UP के सड़क क्रांति का हिस्सा है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बन रहे हैं, हाईवे चौड़े हो रहे हैं। बरेली मंडल के लिए ये गेम-चेंजर है। स्थानीय लोग उत्साहित हैं, लेकिन पारदर्शी प्रक्रिया की मांग भी कर रहे हैं। कुल मिलाकर, सड़कें ही विकास की असली कुंजी हैं।

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