
देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा परीक्षाओं में से एक, NEET-PG की काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में संभवतः पहली बार ऐसे समीकरण बन रहे हैं, जहां बेहद कम या शून्य अंक लाने वाले उम्मीदवार भी MD और MS जैसे विशेषज्ञ कोर्सेज में दाखिले के पात्र हो गए हैं, इस फैसले ने न केवल चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नई बहस छेड़ दी है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने खाली पड़ी पीजी सीटों को भरने के लिए क्वालीफाइंग कट-ऑफ को घटाकर ‘शून्य पर्सेंटाइल’ (Zero Percentile) करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था, इस नियम का सीधा अर्थ यह है कि जिस भी छात्र ने NEET-PG की परीक्षा में भाग लिया है और जिसका स्कोर कार्ड जारी हुआ है, वह काउंसलिंग की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पात्र है।
‘माइनस 40’ स्कोर और दाखिले का गणित
न्यूज रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, ‘जीरो पर्सेंटाइल’ का मतलब तकनीकी रूप से यह है कि मेरिट लिस्ट के सबसे निचले पायदान पर खड़ा छात्र भी अब रेस में शामिल है, चूंकि NEET-PG में नेगेटिव मार्किंग होती है, इसलिए यदि किसी छात्र का स्कोर शून्य से नीचे यानी -40 भी है, तो भी वह ‘जीरो पर्सेंटाइल’ की श्रेणी के तहत काउंसलिंग के लिए आवेदन कर सकता है।
यह गणित कैसे काम करता है?
- सीटों का खाली रहना: हर साल क्लीनिकल और नॉन-क्लीनिकल विषयों में हजारों पीजी सीटें (विशेषकर प्राइवेट कॉलेजों में) खाली रह जाती हैं।
- पात्रता का दायरा: कट-ऑफ को शून्य तक लाने से उन छात्रों को मौका मिलता है जो पहले कम अंकों के कारण बाहर हो गए थे।
- प्राइवेट कॉलेजों की भूमिका: विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम का सबसे बड़ा लाभ उन निजी कॉलेजों को मिलेगा जिनकी भारी-भरकम फीस वाली सीटें खाली रह जाती थीं।
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चिकित्सा जगत में आक्रोश और चिंता
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और मेडिकल एसोसिएशनों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या शून्य या नेगेटिव स्कोर वाले छात्र चिकित्सा की गुणवत्ता के साथ न्याय कर पाएंगे? विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में गिरावट आ सकती है।
क्या यह स्थायी नियम है?
छात्रों और अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ‘जीरो कट-ऑफ’ कोई स्थायी नियम नहीं है, यह केवल सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग के विशेष चरणों के लिए लिया गया एक प्रशासनिक निर्णय है। दाखिले और काउंसलिंग से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर लॉगिन कर सकते हैं।
हालांकि यह फैसला उन छात्रों के लिए एक अवसर की तरह है जो पीजी करना चाहते हैं, लेकिन यह “मेरिट बनाम सीटों” की एक ऐसी जंग बन गया है, जिसका असर भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ना तय है।
















