
भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ी खबर है, रेलवे ने अपने नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है, नए नियमों के मुताबिक, अब कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी, रेलवे ने स्लीपर क्लास के किराए से लेकर टिकट बुकिंग की समय सीमा तक में बड़े बदलाव कर दिए हैं।
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200 किलोमीटर का न्यूनतम किराया नियम
रेलवे के नए अपडेट के अनुसार, अब स्लीपर क्लास में सफर करने के लिए यात्रियों को कम से कम 200 किलोमीटर का किराया देना अनिवार्य होगा, इसका मतलब यह है कि यदि आप मात्र 50 या 100 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं, तब भी टिकट की कीमत की गणना 200 किलोमीटर के आधार पर ही की जाएगी। यह नियम उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो कम दूरी के लिए स्लीपर कोच का उपयोग करते थे।
एडवांस रिजर्वेशन की अवधि हुई आधी
रेलवे ने टिकटों की कालाबाजारी रोकने और यात्रियों की सुविधा का हवाला देते हुए एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) को घटा दिया है, अब यात्री अपनी यात्रा से 120 दिन पहले के बजाय केवल 60 दिन पहले ही टिकट बुक कर पाएंगे, यह नियम लंबी दूरी की प्लानिंग करने वाले परिवारों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, यात्री अब IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट पर केवल 2 महीने पहले ही अपनी सीट सुरक्षित कर सकेंगे।
वेटिंग टिकट और कोच एंट्री पर सख्ती
रेलवे ने स्लीपर कोच में भीड़ कम करने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है, अब वेटिंग टिकट लेकर स्लीपर कोच में चढ़ने वाले यात्रियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें रास्ते में ही ट्रेन से उतारा जा सकता है, साथ ही, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों को भी पहले से अधिक कड़ा किया गया है, जिससे अंतिम समय में प्लान बदलने पर यात्रियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कैसे बचें अतिरिक्त बोझ से?
रेल विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि आपकी यात्रा 200 किलोमीटर से कम है, तो स्लीपर के बजाय जनरल डिब्बे या पैसेंजर ट्रेनों का विकल्प चुनें, अपनी यात्रा के किराए और रूट की सटीक जानकारी के लिए यात्री NTES (National Train Enquiry System) का उपयोग कर सकते हैं।
रेलवे के इन फैसलों से एक तरफ जहाँ राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ आम यात्रियों में इसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
















