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कमाने वाली पत्नी पर पति का कितना हक? कोर्ट के इस फैसले ने बदली तस्वीर, महिलाओं के लिए 5 बड़े कानूनी अधिकार।

पत्नी की कमाई पर पति का हक खत्म? कोर्ट का धमाकेदार फैसला! महिलाओं को मिले ये 5 सुपर अधिकार, शादी के बाद कभी न हों कमजोर, जानें पूरी डिटेल!

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शादी एक साझेदारी है जहां दोनों की जिम्मेदारियां बराबर हैं। लेकिन झगड़ों में अक्सर पत्नी को आर्थिक मदद के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ताजा कोर्ट फैसलों ने साफ कर दिया कि पत्नी की डिग्री, नौकरी या अलगाव भरण-पोषण का हक छीन नहीं सकता। आइए जानें पांच ऐसे फैसले जो हर महिला के लिए मिसाल हैं।

कमाने वाली पत्नी पर पति का कितना हक? कोर्ट के इस फैसले ने बदली तस्वीर, महिलाओं के लिए 5 बड़े कानूनी अधिकार।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त फैसला

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ज्यादा पढ़ी हो या स्किल्ड हो, तब भी पति अपनी ड्यूटी से बच नहीं सकता। जस्टिस गरिमा प्रसाद ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट का मानना था कि वैवाहिक रिश्ते में आर्थिक सुरक्षा जरूरी है, चाहे पत्नी काबिल ही क्यों न हो। ये उन महिलाओं के लिए राहत है जो करियर बना रही हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दी मासिक 17000 रुपये की मदद

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए पत्नी को हर महीने 17000 रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी की थोड़ी बहुत कमाई उसकी जरूरतें पूरी नहीं करती। पति को शादी के बाद का लाइफस्टाइल बनाए रखना पड़ता है। ये फैसला छोटे काम करने वाली महिलाओं को मजबूती देता है।

सुप्रीम कोर्ट राजनैश नेहा केस में लाइफस्टाइल पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में पति को निर्देश दिया कि पत्नी को वैसी ही जिंदगी जीने दो जैसी शादी से पहले थी। पत्नी की अपनी कमाई भत्ते को रोक नहीं सकती। कोर्ट ने कहा कि शादी पार्टनरशिप है, पति की कमाई से परिवार चलाना उसकी जिम्मेदारी।

कोहैबिटेशन न होने पर भी हक बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि वैवाहिक अधिकार मिलने पर भी पत्नी का आर्थिक हक बना रहता है। चाहे साथ रहे या न रहे, पति को मदद करनी होगी। ये घरेलू कलह वाली महिलाओं के लिए बड़ा सहारा है।

जायज कारण से अलगाव पर अधिकार सुरक्षित

रीना कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जायज वजह से अलग रहने पर भरण-पोषण मिलेगा। क्रूरता या उपेक्षा के केस में पत्नी का हक खत्म नहीं होता।

क्या करें भरण-पोषण के लिए

मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 125 के तहत आवेदन दें। डॉक्यूमेंट्स जैसे शादी प्रमाण और इनकम प्रूफ रखें। वकील या हेल्पलाइन 181 से मदद लें। कोर्ट पति की सैलरी का एक तिहाई तक दे सकता है।

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