
आजकल बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता को भूलते जा रहे हैं। नौकरी, कमाई के चक्कर में वो घर छोड़ देते हैं और मां-बाप अकेले तड़पते रह जाते हैं। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने इस दर्द को समझा है। 12 जनवरी को उन्होंने ऐलान किया कि अगले बजट में ऐसा कानून लाएंगे जो सरकारी कर्मचारियों को मजबूर करेगा माता-पिता का ख्याल रखने को। ये सुनकर दिल को सुकून मिला, क्योंकि ये तो हम सबकी कहानी है। आखिर मां-बाप ने हमें पाला, अब हमारी बारी है ना?
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वेतन से 10-15% कटौती
सीएम रेवंत रेड्डी ने साफ कहा कि जो सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेगा, उसके सैलरी से 10-15 प्रतिशत कटेगा। और वो कटी हुई रकम सीधे मां-बाप के बैंक खाते में चली जाएगी। सोचो जरा, कितना सख्त लेकिन सही कदम है! कई बार बच्चे बहाने बनाते हैं – पैसे कम हैं, समय नहीं मिलता। लेकिन ये नियम उन्हें आईना दिखाएगा। रेड्डी जी ने जोर देकर कहा कि ये सिर्फ पैसा नहीं, जिम्मेदारी की बात है। समाज के प्रति जो अपना फर्ज निभाएगा, वही सच्चा इंसान है।
बुजुर्गों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई का वादा
अब मां-बाप की चिंता खत्म! अगर कोई बुजुर्ग शिकायत करेगा कि बेटा-बेटी ख्याल नहीं रख रही, तो सरकार फौरन एक्शन लेगी। सीएम ने कहा कि ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेंगे और कड़ी सजा देंगे। ये सुनकर लगता है जैसे सरकार ने हर बुजुर्ग का हाथ थाम लिया हो। आजकल तो वृद्धाश्रमों में मां-बाप रोते हैं, बच्चे विदेश चले जाते हैं। लेकिन तेलंगाना में अब ऐसा नहीं चलेगा। रेड्डी जी का ये फैसला मानवीय है – बुजुर्गों को गरिमा से जीने का हक दिलाएगा।
‘प्रणाम’ डे केयर सेंटर
और तो और, सरकार ‘प्रणाम’ नाम से डे केयर सेंटर खोलेगी। जहां बुजुर्ग दिन भर रह सकेंगे, खाना-पीना, दवा-इलाज सब मुफ्त। बच्चे नौकरी पर जाएं, शाम को मां-बाप घर लौट आएं। कितना बढ़िया आइडिया है ना? सीएम ने कहा कि ये सेंटर राज्य भर में बनेंगे, ताकि कोई बुजुर्ग अकेला न रहे। हमने देखा है कि कई परिवारों में बेटियां ससुराल चली जाती हैं, बेटे भूल जाते हैं। ऐसे में ये सेंटर वरदान साबित होंगे।
ट्रांसजेंडरों के लिए भी खुशखबरी
सीएम रेवंत रेड्डी ने एक तीर से दो निशाने साधे। उन्होंने ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लिए भी बड़ा ऐलान किया। आगामी लोकल बॉडी चुनावों में हर नगर निगम में उनके लिए एक सह-सदस्य सीट आरक्षित होगी। ये कदम समाज के हर वर्ग को जोड़ने वाला है। रेड्डी जी ने कहा कि सबको बराबरी का हक मिलेगा। सच में, तेलंगाना सरकार इंसानियत की मिसाल कायम कर रही है।
ये फैसला बदलेगा समाज का चेहरा?
अंत में सोचो, अगर हर राज्य ऐसा करे तो? मां-बाप खुश, बच्चे जिम्मेदार। लेकिन चुनौती ये है कि अमल कैसे होगा? शिकायत तंत्र मजबूत बनाना पड़ेगा, भ्रष्टाचार रोकना पड़ेगा। फिर भी, रेवंत रेड्डी की ये पहल तारीफ के काबिल है। आप क्या कहते हो? क्या ये नियम दूसरे राज्यों में भी लागू होना चाहिए? या कोई और तरीका सोचते हो बुजुर्गों की मदद का?
















