
पति-पत्नी के बीच विवाद और गुजारा भत्ते (Maintenance) को लेकर अदालतों में चल रही लंबी कानूनी बहस पर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति की कुल आय में पत्नी की हिस्सेदारी कितनी होगी और किन परिस्थितियों में यह अधिकार लागू होगा, साल 2026 के ताजा अदालती दिशा-निर्देशों के अनुसार, गुजारा भत्ते की गणना के लिए अब ठोस मानक तय कर दिए गए हैं।
Table of Contents
25 प्रतिशत सैलरी पर पत्नी का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को आधार बनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में दोहराया है कि पति की कुल शुद्ध आय (Net Salary) का 25 प्रतिशत हिस्सा पत्नी को गुजारा भत्ते के तौर पर दिया जाना ‘उचित और न्यायसंगत’ है, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि केवल जीवन निर्वाह के लिए नहीं, बल्कि पत्नी को उसी जीवन स्तर (Standard of Living) पर रखने के लिए है, जिसका आनंद वह अपने ससुराल में ले रही थी।
50% से अधिक नहीं हो सकता भत्ता
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में पुरुष पक्ष को भी बड़ी राहत दी है, कोर्ट ने आदेश दिया कि फैमिली कोर्ट किसी भी स्थिति में पति की कुल आय का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजारा भत्ते के रूप में नहीं बांध सकते, अदालत का मानना है कि पति की अपनी व्यक्तिगत जरूरतें और उस पर निर्भर अन्य आश्रितों (जैसे बुजुर्ग माता-पिता) की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डिग्री होने का मतलब यह नहीं कि भत्ता न मिले
जनवरी 2026 के एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने एक अहम कानूनी बिंदु साफ किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित है या उसके पास पेशेवर डिग्री है, तो केवल इस आधार पर पति गुजारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता। ‘कमाने की क्षमता’ (Capacity to earn) और ‘वास्तव में कमाना’ (Actually earning) दो अलग बातें हैं। जब तक यह साबित न हो जाए कि पत्नी की अपनी स्वतंत्र आय है, तब तक पति अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
महंगाई दर के साथ बढ़ेगा भत्ता
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2025 में लागू किए गए नियम के तहत, अब गुजारा भत्ते में हर दो साल में 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि का प्रावधान किया गया है, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि बढ़ती महंगाई के बीच पत्नी को बार-बार अदालत के चक्कर न काटने पड़ें।
किन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा भत्ता?
अदालत ने यह भी साफ किया है कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के पति से अलग रह रही है, या वह खुद इतनी सक्षम है कि उसकी आय पति के बराबर या उससे अधिक है, तो वह गुजारा भत्ते की हकदार नहीं होगी।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों से पारिवारिक अदालतों में लंबित हजारों मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, यदि आप अपने केस की ताजा स्थिति जानना चाहते हैं, तो e-Courts Services पर लॉग इन कर सकते हैं।
















